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Tuesday, May 19, 2009

आप तो अपनी ही जात वाले हो।

अली जी का किस्सा 'कोतो टोको' पढ़कर मुझे अपने पति के घर का एक किस्सा याद आ गया। बात बहुत पहले की है, लगभग ३५ वर्ष पहले की, जब फाउन्टैन पेन उपयोग किए जाते थे और खरीदने से पहले उनसे लिखकर निब की जाँच की जाती थी।


दादा पैन की दुकान पर गए। पैन चुना और फिर उससे लिखकर देखा। प्रायः ऐसे में व्यक्ति अपना नाम ही लिखता है या हस्ताक्षर करता है। दादा ने भी वही किया। दादा का नाम पढ़कर दुकानदार बोला," साहब आप तो अपनी ही जात वाले हो। आपसे दो रुपया कम लूँगा।"


उस जमाने में दो रुपए कम नहीं होते थे। परन्तु जाति में विश्वास न करने वाले दादा बोले," तुम अपना पूरा पैसा लो, मैं तो अपने दोस्त का नाम लिख रहा था।"


दुकानदार बोला, " साहब, आप बहुत ईमानदार हो, दो रुपए बचाने के लिए भी झूठ नहीं बोले।"
उस बेचारे को क्या पता था कि दादा ने ईमानदारी नहीं की थी और झूठ बोला था, जातिवाद से बचने के लिए!


आज भी जब कभी किसी पेन को हस्ताक्षर करने से पहले चलाकर देखती हूँ तो दादा का यह किस्सा याद आ जाता है।


घुघूती बासूती