Showing posts with label माँ की यादों के झरोखे से बहते किस्से. Show all posts
Showing posts with label माँ की यादों के झरोखे से बहते किस्से. Show all posts

Monday, June 01, 2009

माँ की यादों के झरोखे से बहते किस्से..... १ धानसिंह का भाई मानसिंह

धानसिंह का भाई मानसिंह


माँ मेरे पास दस वर्ष बाद रहने आईं हैं। जब तक पिताजी थे दोनों लगभग हर वर्ष सर्दियाँ हमारे साथ गुजारते थे। भारतीय समाज में जहाँ बेटी के घर का पानी भी नहीं पिया जाता था वहाँ मैंने उन्हें हमारे पास आने व रहने के लिए लगभग ३१ वर्ष पहले के जमाने में कैसे सहमत किया यह एक अलग कहानी है। यहाँ तो मैं आपको माँ से सुने किस्से सुनाने जा रही हूँ। माँ से बात करते हुए वे अपनी वर्षों पहले पढ़ी कविताएँ, कहानियाँ या उपन्यास में लेखक ने क्या कहा था आज भी सुना देती हैं। कभी शकुन्तला ने दुष्यन्त को कमल के पत्ते पर नाखून से खुरचकर क्या पत्र लिखा था, कभी किसी कवि की कल्पना तो कभी अपनी दूसरी कक्षा में पढ़ी कविता। माँ ८६ वर्ष की हैं।


उनके बताए कुछ किस्से तो पहले भी सुना चुकी हूँ। लीजिए यह एक जो उन्होंने मुझे तब सुनाया जब मैंने उन्हें नींबूपानी दिया और कहा कि पी लीजिए अन्यथा गरम हो जाएगा तो उन्हें यह याद आया।


धानसिंह का भाई मानसिंह, कोठलपुर में उतरा है
मिलना है तो मिल लो, नहीं तो शीतलपुर को जाता है।



एक स्त्री के पति से मिलने कुछ मेहमान आए। स्त्री भात पका रही थी। वह भात पकाने पर उसका माँड निकालती थी। माँड में बहुत से बी विटामिन होते हैं व ढेर सारा शक्तिवर्धक कार्बोहाइड्रेट। अब यह सब उसे पता था या नहीं, मैं कह नहीं सकती परन्तु यह गरमागरम माँड वह अपने पति को पीने को देती थी। माँड पीना कोई बहुत गर्व का काम नहीं माना जाता होगा। शायद गरीब ही पीते होंगे। सो वह चाहती थी कि इससे पहले कि माँड ठंडा हो जाए पति रसोई में आकर माँड पी ले। मेहमानों के सामने कैसे कहे कि आइए माँड पी लीजिए। सो उसने ये पंक्तियाँ कहीं। मैं और आप ना भी समझ पाएँ परन्तु पति समझ गया और रसोई में आकर माँड पीकर वापिस अपने मेहमानों के बीच चला गया।


चलिए इन पंक्तियों का अर्थ समझते हैं।


धानसिंह= धान से बना चावल
मानसिंह= माँड, क्योंकि धान से बने चावल से बना है इसलिए धानसिंह का भाई (कवि वाली छूट ली गई है।)
कोठलपुर= कोठल या कुठला जो पुराने जमाने में लकड़ी से बना एक कटोरा जैसा होता था। क्योंकि माँड उसमें निकाला गया इसलिए कोठलपुर में उतरा है।
शीतलपुर= शीतल या ठंडा हो जाएगा।


घुघूती बासूती