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Friday, March 30, 2012

तितली का पंख


तितली का पंख हूँ,
पकड़ने का यत्न न करना
टूट तो जाऊँगी ही मैं
किन्तु हाथ तुम्हारे भी
न आऊँगी मैं।
चूरा चूरा हो जाऊँगी
खत्म हो जाऊँगी
किन्तु हाथ तुम्हारे या
अन्य किसी के
कभी न आऊँगी मैं।
मैं हाथी दाँत नहीं
जो अकूत शक्ति वाले
को मारकर तुम पा जाओगे
मैं पंख हूँ नाजुक तितली का
जो तुम छीन ना पाओगे।
तितली का पंख हूँ मैं
चाहूँगी तो अधरों, चिबुक या
पलकों को छू उड़ जाऊँगी मैं
पकड़ना चाहोगे तो हाथ में
शव ही मेरा पाओगे तुम।
घुघूती बासूती