Friday, March 18, 2011

वसन्त तो आया नहीं, होली तुम क्या आ पाओगी?

मेरे शहर में अब तक
वसन्त तो आया नहीं
आम्रमंजरी खिली नहीं
कोयल कभी कूकी नहीं।

सरसों कभी फूली नहीं
गेहूँ बालियाँ दिखी नहीं
खेत में फसल झूमी नहीं
पुरवाई ढंग से चली नहीं।

न कहीं गुलाब खिले
न कहीं कमल खिले
तितलियाँ उड़ी नहीं
भँवरें भी दिखे नहीं।

भूमि पर कुतरे खाए
अमरूदों का चूरा तो
अब तक गिरा नहीं
मिट्ठू भी दिखा नहीं।

पवन में पराग कण
अब तक उड़े नहीं
धरती पर टेसू पुष्प
एक भी बिछे नहीं।

रंग, सुगन्ध बिखरे नहीं
मन तो मिले नहीं
सेमर भी खिला नहीं
रेशमी रूई उड़ी नहीं।

भीड़ तो खूब लगी
मीत ही बने नहीं
चेहरे तो अनगिनित हैं
एक भी परिचित नहीं।

मेरे इस बेरंग शहर में
वसन्त तो आया नहीं,
होली तुम क्या आ पाओगी
प्रकृति ने ही रंग खेला नहीं।

घुघूती बासूती

35 comments:

  1. .......चेहरे तो अनगिनित हैं
    एक भी परिचित नहीं।......
    वर्तमान का सही चित्रण , यही सच है ,सुंदर कविता .
    (पिछली पोस्ट (भूकम्प......) चंडीगढ़ से प्प्रकाशित समाचारपत्र 'आज समाज'में पढने को मिली ,
    बसंत आये ना आये आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाये .

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  2. आपकी इस खबरदारिया कविता से राशेल कार्शन की प्रसिद्द कृति साईलेंट स्प्रिंग -खामोश बसंत की याद आ गयी !
    ऐसे नीरव खामोश बसंत के शहर में होली होने से रही -मगर ये भी कोई बात हुयी भला होली पर !
    आपके माथे आदर भरा अबीर गुलाल -होली है !

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  3. अब क्या करें... कुछ भी नहीं.. फिर भी होली तो खेलनी ही है न..... :)

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  4. शहरीकरण का प्रतिफल होली के आगमन पर शंकाएं पैदा करता है आपका चिंतन जायज है होली की शुभ कामनायें

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  5. कसक का बेहद उम्दा चित्रण मगर फिर भी होली को तो आना है ……………होली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  6. बहुत सुन्दर रचना!
    --
    उनको रंग लगाएँ, जो भी खुश होकर लगवाएँ,
    बूढ़ों और असहायों को हम, बिल्कुल नहीं सताएँ,
    करें मर्यादित हँसी-ठिठोली।
    आओ हम खेलें हिल-मिल होली।।
    --
    होलिकोत्सव की सुभकामनाएँ!

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  7. यह रचना तो रियाद के लिए एकदम सटीक है... होली का एकाध रंग वहाँ तो फिर दिखाई दे जाएगा.... लेकिन यहाँ....ऐसा कुछ भी नहीं...
    होली के विविध रंग मुबारक...

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  8. होली की हार्दिक शुभकामनायें...


    क्या कहें..

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  9. जब पिया नहीं पास
    तो सब लगे उदास ।

    होली की शुभकामनायें ।

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  10. शहर की बेरंग ज़िंदगी का अच्छा प्रस्तुतिकरण है ...


    भीड़ तो खूब लगी
    मीत ही बने नहीं
    चेहरे तो अनगिनित हैं
    एक भी परिचित नहीं।

    सच बड़े शहरों में यही महसूस होता है ..फिर भी होली की शुभकामनायें

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  11. भूल जा झूठी दुनियादारी के रंग....
    होली की रंगीन मस्ती, दारू, भंग के संग...
    ऐसी बरसे की वो 'बाबा' भी रह जाए दंग..


    होली की शुभकामनाएं.

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  12. वर्तमान का सही चित्रण, सुंदर कविता|
    होली की हार्दिक शुभकामनायें|

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  13. भीड़ तो खूब लगी
    मीत ही बने नहीं
    चेहरे तो अनगिनित हैं
    एक भी परिचित नहीं।

    मेरे इस बेरंग शहर में
    वसन्त तो आया नहीं,
    होली तुम क्या आ पाओगी
    प्रकृति ने ही रंग खेला नहीं।
    Rachana behad achhee lagee.

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  14. शायद सब तुम्हारे आने की प्रतीक्षा में हैं .... होली

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  15. लगता है बसंत के दफ्तर में जा कर रजिस्ट्रेशन कराना भूल गईं आप। हर शहर में बसंत ने अपना दफ्तर खोल रखा है। कई रूप हैं उसके। जैसे महिला संगठन, मोहल्ला विकास समीति, मंदिर या फिर आध्यात्मिक संस्था। शहर में बसंत बिना इनकी इजाजत किसी के घर में प्रवेश नहीं कर पाता। किसी ने कहा है...
    यह नया शहर है कुछ दोस्त बनाए रहिए
    दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए।
    .....आपकी कविता मार्मिक है। होली आए और ढेर सारी खुशियाँ साथ लाये। शुभकामनाएँ..।

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  16. पलाश के रंग नहीं तो मन के रंगों से होली खेलना होगा।

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  17. निगेटिव नी सोच्या करते। बी पोजीटिव।

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  18. मन चंगा कर कठौती में गंगा ले आइये.

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  19. यह सब तो गांव में ही मिलेगा..

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  20. आप भी महानगर में रहती हैं, मैं भी महानगर के उपनगर में,
    हमारी वसंत-होली ऐसी ही होती है...

    फिर भी इंटरनेटवा पर आभासी होली तो खेल ही सकते हैं-


    तन रंग लो जी आज मन रंग लो,
    तन रंग लो,
    खेलो,खेलो उमंग भरे रंग,
    प्यार के ले लो...

    खुशियों के रंगों से आपकी होली सराबोर रहे...

    जय हिंद...

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  21. होली पर शुभकामनायें स्वीकार करें !

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  22. हां अक्सर ऐसा आभास होने लगा है, होली पर्व की घणी रामराम.

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  23. होली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  24. घुघूती जी इस शहर को एक कृषि के अच्छे जानकार माली की सख्त आवश्यकता है. आपको और आपके परिवार को होली की बहुत बहुत बधाई और शुभ कामनाएं.

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  25. हृदयस्पर्शी कविता। वसंत/होली/रंगों की आस तो मानव मन में सदा ही रहेगी।
    होली की शुभकामनायें!

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  26. मर्मस्पर्शी कविता ,प्रकृति से मानवीय छेड़छाड़ और परिणतियों को उजागर करती हुई ! सुचिंतित रचना ,सार्थक रचना !


    रंगपर्व की शुभकामनायें !

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  27. आपको होली की हार्दिक शुभकामनाये .

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  28. आपको होली की हार्दिक शुभकामनाये .

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  29. .होली पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ...

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  30. The season of spring has come, and all the plants have blossomed forth.
    This mind blossoms forth, in association with the True Guru.
    So meditate on the True Lord, O my foolish mind.Only then shall you find peace, O my mind
    nice poem but to much passion in not so positive form, basant is associated with new Beginning and hope,the vegetation grew green again bring hope................ happy holi

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  31. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 22 -03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  32. मेरे इस बेरंग शहर में
    वसन्त तो आया नहीं,
    होली तुम क्या आ पाओगी
    प्रकृति ने ही रंग खेला नहीं।

    सुन्दर।

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  33. मेरी लड़ाई Corruption के खिलाफ है आपके साथ के बिना अधूरी है आप सभी मेरे ब्लॉग को follow करके और follow कराके मेरी मिम्मत बढ़ाये, और मेरा साथ दे ..

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