Tuesday, December 07, 2010

कि दिल अभी भरा नहीं!

कार्ला ब्रूनी व सार्कोज़ी फतेहपुर सीकरी गए और कहा जा रहा है कि वहाँ उन्होंने पुत्र के लिए प्रार्थना भी की। पहले विवाह से एक का एक पुत्र व दूसरे के तीन पुत्र हैं किन्तु पुत्रों से भी कभी मन भरता है? सो उन्होंने भी एक 'हमारे' पुत्र की माँग ऊपर वाले से कर ली।

यह बात चाहे यह सिद्ध करे कि फ्रान्स व भारत में बहुत साम्य है या हमारी व उनकी जीवन से अपेक्षाएँ एक सी हैं या नहीं, बस एक बात तो सिद्ध हो जाती है कि यदि समाचार सच है तो मेरी सविताबेन कामवाली और इन फ्रान्सीसी बी में कोई विशेष अन्तर नहीं है।

पाँच छः बच्चों की माँ सविताबेन जब फिर से गर्भवती हुई तो मैंने उससे पूछा कि बार बार (लगभग हर साल) माँ बनने से उसके स्वास्थ्य, परिवार के स्वास्थ्य व आर्थिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है, बच्चियों को भी काम करना पड़ता है तो क्या रुक जाना बेहतर नहीं? सविताबेन ने कहा कि उसे एक बेटा चाहिए सो वह कोशिश करे जा रही है। मैंने जब कहा कि बेटा तो तुम्हारा है। वह बोली कि एक ही है, एक तो और तो चाहिए ही क्योंकि अभी दिल भरा नहीं है।

बहुत सम्भव है कि राष्ट्रपति व उनकी पत्नी को जब अकबर वाला किस्सा सुनाया गया हो तो मजाक में या यूँ ही पति या पत्नी या दोनों ने कहा हो कि उन्हें भी अकबर की तरह संतान चाहिए या शायद पुत्र ही कहा हो। किन्तु सुनने वाले को लगा हो कि वाह देखो ये भी हमारी तरह पुत्र की चाहत रखते हैं। सो सब समाचारपत्र इसकी चर्चा कर रहे हैं।

कल शायद जब कोई दम्पत्ति केवल पुत्री या पुत्रियों से सन्तुष्टि की बात करेगा तो घर के बड़े कह सकेंगे कि फ्रान्स के राष्ट्रपति तक का मन तीन पुत्र पाकर भी पुत्रों से नहीं भरा तो तुम, किस खेत की मूली(या गाजर?) हो?

घुघूती बासूती

24 comments:

  1. इतने लम्बे लम्बे अन्तराल के बाद लिखेंगी तो हमारा दिल कैसे भरेगा ।

    ReplyDelete
  2. मियाँ बीबी राज़ी तो क्या करेगा काज़ी? उनका व्यक्तिगत मामला है, हमें क्या?

    ReplyDelete
  3. यह समाचार सुन भारत की जनसंख्या अपना औचित्य सिद्ध करने में लग गयी है।

    ReplyDelete
  4. अखबार से तो यही सुन रहे हैं...

    ReplyDelete
  5. एक चुटकुला याद आ रहा है पाश्चात्य जीवन शैली पर.- पत्नी पति से- हाय डार्लिंग, ज़रा देखो तो, तुम्हारे बच्चे और मेरे बच्चे मिलकर हमारे बच्चो को पीट रहे हैं.

    ReplyDelete
  6. शुभ कामनाये आपकी बाई और सरकोजी- कार्ला ब्रूनी के लिए . दोनों फलीभूत हों

    ReplyDelete
  7. भारत में कई कहावते है कई पुत्रो के लिए , जैसे एक आंख भी आँख होती है आँखे तो दो अच्छी होती है यानी दो पुत्र होने चाहिए | दूसरा तो बिल्कूल ताना है की सुबह सुबह बाँझ ( जिसको कोई बच्चा ही ना हो ) का मुह देखना ठीक पर एक पुत्र की माँ का मुह देखन ठीक नहीं है | बोलिये अब क्या कह सकते है किसी भी हाल में लोग खुश नहीं है | हम तो अंधे ही सही है :-)

    ReplyDelete
  8. क्या कहा जाए....एक बार कादम्बनी में बच्चन जी का इंटरव्यू पढ़ा था...उनसे पूछा.."आपको अगर लक्ष्मी जी तीन वर मांगने के लिए कहें...तो क्या मांगेंगे?"
    उन्होंने कहा..."मेरे बड़े पुत्र के एक बेटा और एक बेटी है..छोटे पुत्र की तीन बेटियाँ ....मैं लक्ष्मी जी से तीन बेटे मांगूंगा..मेरे परिवार का समीकरण बिगड़ गया है. "

    उन्होंने मजाक में ही कही होगी ये बात पर क्यूँ कही...

    ReplyDelete
  9. :) पोस्ट तो पोस्ट ..टिप्पणियाँ भी कमाल :)

    ReplyDelete
  10. मैं जानता था कि इस खबर पर कौन रिएक्ट करेगा :) अच्छी पोस्ट / सार्थक पोस्ट !

    ReplyDelete
  11. शुक्र है... कोई तो बात विदेशियों ने हमसे सीखी है

    ReplyDelete
  12. प्रभू सबकी मनोकामनाएं पूरी करें:)

    ReplyDelete
  13. सविताबेन और कार्ला ब्रोनी दोनों को हमारी शुभकामनाएँ|

    ReplyDelete
  14. aapke lekh kamaal upar se itni mazedaar tipanniya ...kyaa kare comment subscribe kiye lete hai

    ReplyDelete
  15. शायद ताज़महल में जाकर मन्नत मांगने की बात ही कुछ और है । कम से कम सरकोजी जी ऐसा ही सोचते होंगे ।

    ReplyDelete
  16. भला हो सरकोजी-सरकोजियाइन का।

    ReplyDelete
  17. जहाँ तक मैं समझता हूँ कि इनकी पूर्व संतानें इनके पहले के विवाहों से उत्पन्न हई होंगी. अब ये दोनों भी अपने प्रेम को कोई ठोस सबूत इस दुनिया में छोड़ जाना चाहते हैं. हाँ इस लिए एक पुत्र कि इच्छा रखना समझ नहीं आया. कहीं दुभाषिये से कोई गलती तो नहीं हुई.

    ReplyDelete
  18. भारत भूमि की कुछ तो विरासत वो साथ लेकर जायेंगे........... धन्य हो फ्रांस, धन्य हो यूरोप.........

    ReplyDelete
  19. सही लिखा है. एकदम सही. भारत हो कि फ्रांस पर बेटों से किसी का जी नहीं भरता.

    ReplyDelete
  20. वाह बेटों की महानता ....!!!!!

    ReplyDelete

  21. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

    ReplyDelete
  22. बेटा बेटा ही होता हैं जी
    आप नहीं समझेगी
    नहीं सुधरेगी !!!!!!!!!!!!!!!!

    ReplyDelete
  23. सुबीर रावत जी ने सही कहा। शुभकामनायें।

    ReplyDelete
  24. भाई वाह विदेशी भी हमारी दाद देते हैं.!

    ReplyDelete