Wednesday, January 20, 2010

ये ही क्या वसंत है?...........घुघूती बासूती

प्रकृति से रिक्त
रंगों से अछूती
धूल के गुबार हैं।

न कोई आम्रमंजरी
न कोई मंजरी महक
डीजली,पैट्रौली बास है।

कोयल नहीं कूकती
चिड़िया नहीं चहकती
वाहनों की बस गूँज है।

सरसों नहीं फूलती
न गेहूँ की बालियाँ
बोनसाई बरगद ही वृक्ष है।

ठंड तो पड़ी नहीं
अंगीठी सेकी नहीं
ए सी ने गिराया तापमान है।

हृदय में न उमंग
मन में न तरंग
ये ही क्या वसंत है?

घुघूती बासूती

27 comments:

  1. इधर ठण्ड से तो जान जा रही है -बसंत ,,,तोबा तोबा ?

    ReplyDelete
  2. ठंड तो पड़ी नहीं
    अंगीठी सेकी नहीं
    ए सी ने गिराया तापमान है।
    आप शायद आजकल पुणे में रह रही है , इसलिए ऐसा कह रही है, यहाँ टन ग्लोबल कूलिंग हो गया है ! खैर, वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये !

    एक बात और कहनी थी कि आपके ब्लॉग को खोलते वक्त कई बार मेरा कंप्यूटर हैंग हो जाता है , क्या ऐसा अधिक विजेट लगे ल्होने की वजह से तो नहीं ?

    ReplyDelete
  3. अभी नाम से आया है असल में न जाने कब आएगा वाकई ठंड जबरदस्त है इस बार :)

    ReplyDelete
  4. जीबी,
    "वनन में बागन में बगरयो बसंत है" विस्मृत हो चला है ! आपने बहुत ही भावपूर्ण कविता कही है ! ओह....बिजली गुल, तो बसंत के साथ टिप्पणी भी गुल ....!

    ReplyDelete
  5. यदि यही वसन्त है तो यह क्या है?

    बरन बरन तरु फूले उपवन वन,
    सोई चतुरंग संग दल लहियतु है।
    बंदी जिमि बोलत विरद वीर कोकिल है,
    गुंजत मधुप गान गुन गहियतु है॥
    आवे आस-पास पुहुपन की सुवास सोई
    सोने के सुगंध माझ सने रहियतु है।
    सोभा को समाज सेनापति सुख साज आजु,
    आवत बसंत रितुराज कहियतु है॥
    "सेनापति"

    ReplyDelete
  6. यह महानगरीय कविता है। जरा नगर से बाहर जा कर देखिए वन और उपवन में वसंत तो है।

    ReplyDelete
  7. जनसंख्या ऐसे ही बढ़ती रही तो एक दिन कविताओं में ही रह जायेगा.

    ReplyDelete
  8. आइये अपनी जडो की ओर वहा वैसा ही वसन्त आया है जैसा आपने देखा होगा

    ReplyDelete
  9. वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये !

    ReplyDelete
  10. हृदय में न उमंग
    मन में न तरंग
    ये ही क्या वसंत है?..
    वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये...

    ReplyDelete
  11. आपको भी वसंत पंचमी और सरस्वती पूजन की शुभकामनाये !

    ReplyDelete
  12. चलिये आप शुरु आत करे, कल से कार मै घुमना बन्द, ऎ सी को बन्द करे, फ़्रिज भी एक तरफ़ रख दे, फ़िर आप को देख कर लोग भी यही करेगे, ओर फ़िर आयेगा अति सुंदर सुगंधित आप की पसंद का बसंत, चारो ओर हरियाली ही हरियाली.
    वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये

    ReplyDelete
  13. अब तो महानगरो से बाहर भी ऐसा हीं हो रहा है……

    ReplyDelete
  14. इस बार वसंत पंचमी जल्दी आ गयी, वसंत तो अभी आया ही नहीं. कुछ वर्षों के बाद तो मेरे ख़्याल से सिर्फ़ गर्मी और सर्दी ही रह जायेगी वसंत और शरद्‌ का तो पता भी नहीं चलेगा.

    ReplyDelete
  15. Aapke sneh aur prerak prasang ke liye bahut bahut shukriya maam... lekin afsos ki koi us lekh ka bhav nahin pakad paaya.. sabne nakaratmak soch ya dar hi samjha.. khair... aap pahli baar blog par aayeen aasheerwad diya ye kafi hai..
    yahan kiski tareef jyada karoon kavita ki ya chitra ke chayan ki???
    ye mere liye bhi mushkil sawal hai..
    Jai HInd...

    ReplyDelete
  16. निश्चित ही कुछ दिनों में वसंत का मादक स्वरूप नष्ट हो जायेगा - ऐसा लगता है । महानगरीय वसंत की एक बानगी तो आपने दे ही दी । आभार ।

    ReplyDelete
  17. मुम्बई महानगरी में प्रवासी वसंत.

    ReplyDelete
  18. काहे को बसंत, बस अंत अब आयो है !

    ReplyDelete
  19. "ठंड तो पड़ी नहीं
    अंगीठी सेकी नहीं
    ए सी ने गिराया तापमान है।"
    "हृदय में न उमंग
    मन में न तरंग
    ये ही क्या वसंत है?.."

    बहुत खूब
    सुना है, उत्तर भारत मे बहुत शीत लहर है, इस बार. वैसे तो, यहाँ मुबंई मे तो ठडं का कुछ खास असर नहीं. शीत और बसंत का कुछ पता नहीं.

    ReplyDelete
  20. aur kuch lge na lge shadiyo ke ki bhar se to basant pancmi ki upsthiti hai hi

    ReplyDelete
  21. आपने गीत को अपना स्नेह दिया आभारी हूँ. इस बहाने आपके रचना संसार से परिचित होने का सौभाग्य मिला.
    आपकी सोच अलग है. अच्छी है.
    आपका ब्लाग बडी मुश्किल से खुलता है. ये क्या कारण है?

    ReplyDelete
  22. पत्थरों के जंगल में 'घुघूती' को ऐसा ही बसंत तो मिलेगा!
    ..ह्रदय स्पर्शी कविता के लिए आभार.

    ReplyDelete
  23. ज्ञानदायिनी मातु का जो करते हैं ध्यान!
    माता उनके हृदय में भर देती हैं ज्ञान!!

    ReplyDelete
  24. ..ह्रदय स्पर्शी कविता के लिए आभार.

    ReplyDelete
  25. बसंत की कविता मे ए.से. का यह प्रयोग अच्छा लगा

    ReplyDelete