Thursday, December 24, 2009

और आप सोचते थे कि मनुष्य और पक्षी ही गृह निर्माण करते हैं!.......घुघूती बासूती



हमारे सोचने से क्या होता है? इन्डोनेशिया की एक औक्टॉपस की प्रजाति तो ऐसा बिल्कुल नहीं सोचती। वे नारियल के कटोरीनुमा खोल इकट्ठा करते हैं। अब अष्टभुज हैं तो अपनी भुजाओं का प्रयोग भी खूब करते हैं। वे समुद्र के तल से मनुष्यों द्वारा फेंके गए नारियल के खोल उठाते हैं। उनमें से रेत आदि खाली करते हैं और फिर उन्हे अपने निवास स्थान पर ले जाते हैं। वहाँ जाकर दो खोलों को तरीके से एक के ऊपर एक रखकर अपना मकान बना लेते हैं।

काश हमारे नाप के खोल भी मिलते। फिर हम भी अपनी मनपसंद जगह पर अपना मकान बना लेते। जब ऊब जाते तो मकान उठाकर कहीं और ले जाते।

अपृष्ठवंशी प्राणी द्वारा औजार के उपयोग का यह पहला उदाहरण है।

नोटः चित्र नैशनल ज्योग्राफिक से साभार लिए गए हैं।

घुघूती बासूती

24 comments:

  1. वीडियो देखा था, मजेदार.

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  2. रोचक ,ऑक्टोपस बुद्धिमान होते हैं !

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  3. शुरू में हम भी प्रकृति प्रदत्त खोलों,पत्थर,चट्टानों, घासफूस वगैरह का इस्तेमाल करते रहे हैं ...कृत्रिम खोल तो अब बना पा रहे हैं, हो सकता है आक्टोपस भी आगे चल कर हमारी तरह से कृत्रिम खोल बनाने लग जाएँ !

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  4. ये नारियल वाला आइडिया तो बड़ा पसंद आया।
    वैसे अंग्रेजों के पास तो चलते फिरते घर होते हैं।

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  5. रोचक जानकारी।आभार।

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  6. वाह! ग़ज़ब कि जानकारी....

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  7. रोचक एवं नवीन जानकारी !

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  8. रोचक जानकारी..हमारे नाप का नारियल....हा हा!! :)

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  9. बहुत खूब.. अली जी से सहमत हूँ। नैसर्गिक वासस्थानों से शुरुआत कर आज इंसान भी तो नकली घरौंदो में रह रहा है.. क्या पता कल को ऑक्टोपस का कल ये नैसर्गिक ठिकाने से मन भर जाये..

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  10. अब तो कीड़े मकोड़ों को सहानुभूति दिखाने से पहले इनकी बुद्धिमत्ता को नमन करें ...
    रोचक दिलचस्प जानकारी ....

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  11. एक नई जानकारी मिली! धन्यवाद!

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  12. वाह। अब चोट कैसी है?

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  13. "काश हमारे नाप के खोल भी मिलते। फिर हम भी अपनी मनपसंद जगह पर अपना मकान बना लेते। जब ऊब जाते तो मकान उठाकर कहीं और ले जाते।"

    विचार अच्छा है जी
    वीडियो कुछ ही दिन पहले देखा था

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  14. मजेदार और बेहतर जानकारी..

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  15. har koi apna ashiyana bnana janta hai
    budhimta ka anutha udaharn

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  16. मनुष्‍य को बुद्धि की खासियत जो प्रकृति ने दी है .. इसके सिवा और कोइर् सुविधा वो नहीं देनेवाली !!

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  17. रोचक! एक आशियाना तो सबकी जरूरत है। कोई-कोई अच्छा बना लेता है।

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  18. जानकर अच्‍छा लगा कि घर बनाने के जीन्‍स हमें अपने इंसानी पूर्वजों से नहीं मिले हैं.

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  19. घर का होना ही सुखद एहसास है :)

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  20. बहुत सुन्दर रचना
    बहुत बहुत बधाई .....

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