गर्भनिरोधक की हर खोज ने स्त्री को कुछ और मुक्ति दी है, कुछ और विकल्प दिए हैं। जीवन जीने की शैली का चुनाव, बच्चे हों या न हों, हों तो कितने व कब, यह सब चुनाव तभी संभव हुआ जबसे गर्भनिरोधक का विकल्प उसे मिला। उससे पहले उसके पास यदि विकल्प नाम की कोई वस्तु थी तो केवल विवाह करना या न करना ही था। वह विकल्प भी विरली स्त्रियों को ही उपलब्ध था। यदि हम नारी मुक्ति का छोटा सा इतिहास देखें तो उनकी मुक्ति का लगभग सबसे बड़ा श्रेय अपनी प्रजनन शक्ति पर खुद के नियंत्रण को ही जाएगा। जो स्त्रियाँ आज भी मातृत्व के बारे में स्वयं निर्णय नहीं ले पातीं वे आज भी मुक्त नहीं हैं।
पुरुष को भी इससे काफी लाभ हुए हैं। आज के कठिन जीवन में छोटा परिवार उसे भी काफी सीमा तक राहत दे रहा है, साथ ही साथ निश्चिन्त वैवाहिक जीवन जीने का अवसर भी।
विवाह करने की उम्र बढ़ती ही जा रही है। स्वाभाविक है कि प्रत्येक व्यक्ति ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए इतनी प्रतीक्षा नहीं करता। ये सब उपाय उनके लिए भी मुक्ति का साधन हुए हैं। कन्डोम ने यौन रोगों के भय से भी काफी सीमा तक मुक्ति दी है। इसके सिवाय हर उपाय का कुछ न कुछ मूल्य स्त्री के शरीर ने ही चुकाया है। किन्तु फिर भी यदि हानि लाभ को तोला जाए तो लाभ ही अधिक हुए हैं।
अब यह नई एमर्जेन्सी गोली आ गई है। इसके विज्ञापन में ही कहा जाता है कि यह गर्भपात से बेहतर है। जोकि गलत नहीं हो सकता। किन्तु क्या साथ में यह नहीं बताया जाना चाहिए कि यह केवल और केवल आपातकाल के लिए है इसका गर्भनिरोधक की तरह उपयोग नहीं होनी चाहिए? कोई जीवन में दो चार बार ले तो समझा जा सकता है किन्तु यदि इसे बार बार लिया जाए तो यह अपने शरीर के हॉर्मोन्स के साथ खिलवाड़ है। कहीं नहीं बताया जाता कि कौन इसे न ले। यदि इसके विषय में पढ़ें तो पता चलेगा कि levonorgestrel से जिसे एलर्जी हो वे नहीं ले सकते, या फिर जो दमे, रक्तचाप, मधुमेह या टी बी आदि की दवा ले रहे हों उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर ही यह गोली खानी चाहिए।
सिरदर्द की गोली की तरह यदि स्त्रियाँ इसका उपयोग करने लगेंगी तो इसका दीर्घकालीन परिणाम क्या होगा हमें पता नहीं है। हो सकता है कि गोली लेने के बाद केवल छोटे मोटे दुष्प्रभाव ही होते हों जैसे मितली, चक्कर, सिरदर्द। फिर भी एक दो दुष्परिणाम होने का भय तो है ही। ठीक वैसे ही जैसे हर अच्छी वस्तु के साथ होता है। ये दो परिणाम हो सकते हैं यौन रोग और पुरुष का अपने उत्तरदायित्व से मुँह मोड़ना।
यदि इस गोली का प्रयोग विवाहेतर या विवाहपूर्व सम्बन्धों में किया गया तो यौन रोगों के बढ़ने की सम्भावना अधिक हो जाएगी।
पुरुष आज तक खुद की नसबंदी से बचने की कोशिश में लगा रहता था। किन्तु कुछ पुरुष अनचाही संतान के भय से नसबंदी करा लेते थे, क्योंकि अन्य कारणों के अलावा उन्हें कॉन्डोम में शतप्रतिशत सुरक्षा नहीं महसूस होती थी। अब वे सोच सकते हैं कि यदि कभी दुर्घटना घटी तो यह गोली तो है ही ना।
हाल में सुना कि एक युवती का विवाह हुआ। पति विवाह के कुछ दिन बाद विदेश लौटने वाला था सो गर्भनिरोधक गोली या अन्य उपाय करने की बजाए युवती ने रोज आइ पिल खाई। यह हाल तो पढ़ी लिखी कामकाजी युवती का था तो फिर अनपढ़ या कम पढ़ी लिखी युवतियाँ कितनी सतर्क हो्गी यह सोचने की बात है। शायद तम्बाकू की तरह ही इस गोली के विज्ञापन के साथ भी चेतावनी दिखाई जानी चाहिए। यह गोली बलात्कार या किसी अन्य आपदा में तो वरदान साबित हो सकती है किन्तु नियमित उपयोग के लिए नहीं हैं यह ध्यान रहना चाहिए। जैसे हम हर स्थिति से निपटने के लिए प्लैन ए और साथ में प्लैन बी भी बनाते हैं वैसे ही यह केवल प्लैन बी हो सकती है प्लैन ए नहीं। स्त्रियाँ वैसे ही अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होती हैं। कहीं यह आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली ही कोई आपदा न ले आए।
घुघूती बासूती
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Tuesday, November 17, 2009
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