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Thursday, June 16, 2011

महिलाओं के लिए चौथा सबसे खतरनाक देश भारत!

हम उस देश के वासी हैं......
१. जहाँ स्त्री जीवित जलाई जाती है।
२. जहाँ स्त्री गर्भ में मारी जाती है।
३. जहाँ स्त्रियों की ऑनर किलिंग की जाती है।
४. जहाँ स्त्री पर तेजाब डाला जाता है।
५. जहाँ स्त्री की तस्करी की जाती है।

मेरा भारत महान, इन्डिया शाइनिंग, ऊँची विकास दर और न जाने क्या क्या कहते हम थकते नहीं हैं। किन्तु थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की कानूनी समाचार सेवा ट्रस्ट लॉ ने जो सर्वे करवाया उसके अनुसार महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश हैं...

१. अफगानिस्तान
२. कोन्गो
३. पाकिस्तान
४. भारत
५. सोमालिया

इस सर्वे में घरेलू हिंसा, महिलाओं के प्रति आर्थिक भेदभाव से लेकर एसिड हमलों को आधार बनाया गया है. इस सर्वेक्षण के तहत पांच देशों के 213 जेंडर मामलों के जानकारों से सवाल पूछे गए. इसके तहत उनसे खतरनाक का मतलब, स्वास्थ्य सुविधाओं, यौन हिंसा, हिंसा, सांस्कृतिक या धार्मिक तथ्यों से जुड़े सवाल पूछे गए.


'भारत का चौथा नंबर मुख्य तौर पर कन्या भ्रूण की हत्या और मानव तस्करी के कारण है. 2009 में तात्कालीन गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने कहा था कि हर साल 10 करोड़ लोग खासकर महिलाओं और लड़कियों की तस्करी की जाती है. यह बात इतनी आम है लेकिन सरकार और पुलिस के चंगुल से बच जाती है.

भारत के केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई का अंदाज है कि 2009 में 90 फीसदी तस्करी देश में ही हुई और देश में करीब 30 लाख यौनकर्मी हैं जिनमें अधिकतर बच्चियां हैं.

यौन कर्मियों के अलावा मजदूरी, जबरन विवाह के मामले भी शामिल हैं. और आंकड़ें कहते हैं कि इस तरह के अवैध काम करने के वालों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई नहीं की जा रही है।'

हम सब जानते हैं कि यह सब हमारे देश में होता है। स्त्री भ्रूण हत्या जैसी नई प्रथा का जन्म हमारे ही देश में हुआ है। प्रायः यह सोचा जाता है कि विज्ञान मनु्ष्य को समझदार बनाता है, रुढ़ियाँ तोड़ता है, लोगों की आँख खोलता है। किन्तु हमारे देश में तो धड़ल्ले से विज्ञान का दुरुपयोग स्त्री भ्रूण हत्या के लिए किया जाता है। पहले स्त्री शिशु हत्या होती थी जिससे परिवार के हाथ खून में रंग जाते थे। किन्तु अब हमने एक साफ सुथरा तरीका ढूँढा है। हस्पताल जाओ, भ्रूण का लिंग पता लगाओ और स्त्री हो तो हत्या वहीं डॉक्टर से करवाओ। न जन्म देने तक उसे झेलो और न जन्म के बाद मारने का लफड़ा।

किन्तु यह मानव तस्करी वाली बात विशेषकर उसके आँकड़ें हजम करने कठिन हैं। यदि ये आँकड़े सही हैं तो कहा जा सकता है कि हर बारह में से एक भारतीय बेचा खरीदा जाता है। क्योंकि यह मुख्यतः स्त्रियों के साथ होता है व स्त्रियों की जनसंख्या यदि ५८.६ करोड़ मानकर चलें तो यह मानना कि उनमें से १० करोड़ या यदि यह भी मान लें कि इसमें से एक करोड़ तस्करी लड़कों की होती होगी तो भी ५८.६ करोड़ स्त्रियों में से ९ करोड़ की तस्करी होती है मानना काफी कठिन है। इसका अर्थ हुआ कि १५.३५ प्रतिशत स्त्रियों की तस्करी होती है। किन्तु यह बात असम्भव सी लगती है। मुझे लगता है यह लाख, करोड़ और मिलियन बिलियन को मिलाकर बोलने के कारण है। अचानक हम मिलियन बिलियन में बात करने लगे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि 2009 में तात्कालीन गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने जब कहा था कि हर साल 10 करोड़ (१०० मिलियन ) लोग खासकर महिलाओं और लड़कियों की तस्करी की जाती है तो कहीं वे १०० लाख तो नहीं कह रहे थे। वैसे भारतीय १०० लाख नहीं १ करोड़ सोचता है। 'In 2009, India's Home Secretary Madhukar Gupta had remarked that at least 100 million people were involved in human trafficking in India, according to the survey.' कहीं ऐसा तो नहीं है कि १ करोड़ लोग बेचे खरीदे नहीं जाते बल्कि कुल मिलाकर १ करोड़ लोग बिकते, बेचते खरीदते हैं व इस धंधे से जुड़े हैं।

जो भी हो, यदि ये आँकड़े कुछ गलत भी हों, तो भी दस बीस प्रतिशत कम करके भी कहें तो भी इन आँकड़ों व संसार में स्त्रियों के लिए इतनी खतरनाक जगह होने के लिए हमें लज्जा तो आनी ही चाहिए साथ साथ 'यत्र नारी पूजयन्ते' वाली सुभाषित को भी बदल 'जहाँ नारी गर्भ में ही मारी जाती हो' जैसी कोई नई सुभाषित रचनी चाहिए। साथ साथ अपने जीवित होने व बेचे खरीदे न जाने को भी अपना सौभाग्य मानना चाहिए।

घुघूती बासूती