Monday, June 30, 2008

फिर से नाच रहा है मोर

फिर से नाच रहा है मोर
चिरप्रतीक्षित वर्षा ॠतु आई है,
मैंढक मिलकर शोर मचाते
ले जल काली बदरी आई है।


गरज रहे हैं बादल काले
चमक रही नभ में बिजली है,
सूर्य जा छिपा बादल के पीछे
सतरंगी रंग नभ में छाए हैं।


चिहुँक रहे हैं पंछी सारे
भंवरे भी आज बौराए हैं,
खिल रही हैं सारी कलियाँ
तितली ने रंग बिखराए हैं।


हरित प्रहरी से वृक्ष झूमते
मादक सुमन सुगन्ध छाई है,
हर मन हो रहा आज बाँवरा
सावन ने प्रणय धुन बजाई है।


रिमझिम पड़ती बौछारों से
नई कोंपलें चहुँओर उग आईं हैं,
धरती का आँचल हरा हो गया
अम्बर ने नए वस्त्र पहनाए हैं।


पंख फैलाकर मोर नाचता
मोरनी को उसे लुभाना है,
झूम झूमकर नाच नाचकर
प्रिया को आज रिझाना है।


घुघूती बासूती

पुनश्चः वर्षा पर एक और कविता .....वर्षा तुम जल्दी आना

घुघूती बासूती

17 comments:

  1. बहुत भला लगा,
    ये वर्षा के सौँदर्य का गीत -
    बहुत स्नेह के साथ,
    - लावण्या

    ReplyDelete
  2. वाह वाह वाह!
    मन मयूर झूम उठा.
    छायावाद उभर आया जी,बधाई
    आलोक सिंह "साहिल"

    ReplyDelete
  3. bahut sundar varnan hai...

    lucky hain aap jo barsaat ka anand le rahe hain --yahan mere shahar mein temp=49 official hai 51 unofficial hai....:(--aap ki kavitaon se hi barish ka lutf utha rahe hain..:)

    ReplyDelete
  4. अजी हमारे यहाँ तो बरखा बहार पहले ही आ चुकी है। और आपकी बरखा बहार भी सुन्दर है।

    फिर से नाच रहा है मोर
    चिरप्रतीक्षित वर्षा ॠतु आई है,
    मैंढक मिलकर शोर मचाते
    ले जल काली बदरी आई है।
    पंख फैलाकर मोर नाचता
    मोरनी को उसे लुभाना है,
    झूम झूमकर नाच नाचकर
    प्रिया को आज रिझाना है।

    ReplyDelete
  5. हर मन हो रहा आज बाँवरा
    सावन ने प्रणय धुन बजाई है।

    बहुत सुंदर लगा यह वर्षा गीत ..

    ReplyDelete
  6. वाह वाह वाह!

    ReplyDelete
  7. ये तो पाठ्यपुस्तक के प्रकृति सौंदर्य वाली किसी कविता के समान लगी !... बहुत खुबसूरत.

    ReplyDelete
  8. behtarin,aafrin,bahut hi sundar rachana badhai

    ReplyDelete
  9. अरे वाह यहा भी बारिश.. लगता है ब्लॉग जगत में मानसून आ गया... बहुत सुंदर लिखा आपने

    ReplyDelete
  10. गरज रहे हैं बादल काले
    चमक रही नभ में बिजली है,
    सूर्य जा छिपा बादल के पीछे
    सतरंगी रंग नभ में छाए हैं।

    बहुर सुन्दर रचना ,

    सादर
    हेम ज्योत्स्ना

    ReplyDelete
  11. वर्षा गीत मनभावन है, बहुत बधाई.

    ReplyDelete
  12. वर्षा ऋतु वर्णन के समृद्ध भारतीय काव्य जगत को आपका यह उपहार पसंद आया

    ReplyDelete
  13. Aapki tippanike liye dhanyawad!
    Aaj pehli baar is bahane aapke blogpe aayi aur warshaa geet ka aanand uthaya!!
    Ab aurbhi padhne jaa rahi hun!!
    Shama

    ReplyDelete
  14. वाह!
    बहुर सुन्दर रचना...यह गीत मनभावन कविता के समान लगी

    ReplyDelete
  15. रिमझिम पड़ती बौछारों से
    नई कोंपलें चहुँओर उग आईं हैं,
    धरती का आँचल हरा हो गया
    अम्बर ने नए वस्त्र पहनाए हैं।

    behad sundar aur saral rachna!!
    dil ko choone vali .

    ReplyDelete
  16. बेहद खूबसूरत...बहुत उम्दा...वाह!

    ReplyDelete