Wednesday, April 30, 2008

मेरे घर के सामने







मेरे घर के आसपास हरियाली का साम्राज्य है। तरह तरह के पेड़ पौधे, कुछ मालियों द्वारा लगाए गए तो कुछ स्वयं उगे हुए, जहाँ तहाँ अपना सौन्दर्य बिखेरते हैं। यहाँ पर दी हुई फोटो साल के अलग अलग समय पर ली गईं हैं। कुछ मैंने भी ली हैं।


यहाँ फैन पाम, नारियल, गुलमोहर (मे फ्लावर), केज़्युरिना की फोटो हैं ।


मेरी पिछली पोस्ट बिटिया के कैमरे से पर दी टिप्पणियों के लिए धन्यवाद व पाठकों का भी धन्यवाद ।
लावण्या जी, दिनेश जी, समीर जी, डॉ चोपड़ा जी, नितिन जी, हर्षवर्धन जी, पाण्डेय जी, डॉ अजीत जी, पारुल जी, अभय जी, अफ़लातून जी, ममता जी, अभिषेक जी, पी डी जी, प्रियंकर जी, कुश जी, नीरज जी, अजित जी , डॉ आर्य व इला जी, फोटो देखने व सराहने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।
समीर जी, बिटिया दिल्ली में अपनी पी एच डी की थीसिस देकर लगभग ८ माह अमेरिका रहकर वाइवा के लिए वापिस भारत आई व अब अपने पति के वापिस लौटने की प्रतीक्षा में है । दोनों का भारत में ही रहना लगभग निश्चित है । सो अमेरिका घूमना फिर कभी ।

अफ़लातून जी, रबर-प्लान्ट(नया हेडर) भी मेरे बगीचे का है। यह मेरे कमरे के पास ही लगा है व मेरे कमरे को अपनी छाया देकर ठंडा रखता है । फोटो शाम के समय छत से ली गई है । आपके व डॉ चोपड़ा जी को गीत याद आने की खुशी है । आशा है ये गीत मेरे जीवन के भी यथार्थ बने रहेंगे।

पी डी जी, हाँ मेरी बिटिया को भी फोटोग्राफी का शौक है। बहुत पुराना नहीं, लगभग नया नया ही है, या यूँ कहिये कि पूरा करने का समय अब मिल रहा है। पढ़ाई के दौरान तो लैब व गाइड के अलावा सोचने का समय बहुत कम ही मिलता था। आशा है, आपकी खींची फोटो देखने का भी अवसर मिलेगा ।

अभय जी, मेरे आस-पास बड़ा सौन्दर्य ही है और लगभग कुछ नहीं । केवल एक दुकान, एक बैंक की शाखा, एक विद्यालय, एक क्लब और कॉलोनी में ठीक उतने मकान जितने दिल्ली में हमारी एक सोसायटी में हैं याने लगभग एक सौ बीस !

घुघूती बासूती

18 comments:

  1. हरियाली स्वास्थ्य और मन दोनों के लिए लाभकारी है

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  2. आप लोगों का घर समुद्र से कितनी दूर है ? Fan Palm ऐसा होता ही है या इस आकृति में लाने के लिए मानवीय प्रयास भी करना पड़ता है ।

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  3. कितनी सुंदर जगह रहती हैं आप-

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  4. वाह !
    प्रकृति का एक और खूबसूरत पहलू।
    एक से बढ़ कर एक।

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  5. वाह! आपका घर तो बहुत सुंदर जगह पर है..

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  6. हरियाली तो मेरे घर से भी दिखती है लेकिन आप जैसी विविधता लिए हुए नहीं.हरियाली सिर्फ़ चार बारिश के महीनों के दौरान ही रहती है उसके बाद तो सूखे पहाड़ और मैदान नज़र आते हैं. ऐसी हरियाली के बीच इश्वर हर किसी को नहीं रहने देता आप सच में खुश किस्मत हैं.
    नीरज

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  7. app pics r beautifuldharti ka dulhani roop bahut sundar,must say u r lucky to live in that greenery palce:);),aapki photography skill lajawab hai ghughuti ji,ur header pic is so attractive.

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  8. बहुत सुन्दर तस्वीरों से समा बँधा है.

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  9. मनमोहक तसवीरें।

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  10. सच ! कुदरत तो फूल, पेड पौधोँ मेँ और नैसर्गिक जीवोँ के समागम मेँ ही मुस्कुराती है :-)
    - लावण्या

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  11. इतना सब सुंदर परिदृश्‍य आपके 'घर के सामने'
    तो हम क्‍यूं ना गायें----'इक घर बनाऊंगा तेरे घर के सामने' ....
    मुंबई से देखें तो ये तो स्‍वर्ग लग रहा है ।

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  12. आपका घर तो पर्यटन स्थल है।

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  13. कुदरत ने कितने अनमोल तोहफे हमें दिए हैं,पर हम हैं कि इन्हें मिटाने पर और खोने पर लगे हुए हैं.
    इतने खूबसूरत नज़ारों को बस देखते रहने का दिल करता है,ऐसे मंज़र सामने हों तो दिल की सारी उदासी पल भर में ख़त्म हो जाती है.
    बहुत खूबसूरत

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  14. आपको जलने की बू नही आई....हाय हमारे आस पास तो रहे सहे पेड़ कटवा कर लोग गाड़ी के शेड डाल रहे है....

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  15. फ़ोटोस बहुत ही सुंदर है। आप के कमरे की ठंडक यहां तक पहुंच रही है।

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  16. दिल को ठन्डक पहुंचाने वाले चित्र,मई की झुलसती गर्मी में खस के शर्बत का सा काम कर गये आप के हरे भरे लहलहाते पेड.

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