मंगलवार, फ़रवरी 05, 2008

नोटपैड बहना ,क्यों डराती हो इतना ?

 

 

नोटपैड बहना ,
क्यों डराती हो इतना ?
चलो मिल बनाए गुझिया,
जिसे देख सीखे अपनी गुड़िया,
चलो लगाएँ उसे भी रसोई में
क्या धरा है उसकी पढ़ाई में ?
पढ़ना ही है तो कितना है पढ़ने को-
पढ़ो ‘गृहशोभा’, ‘गृहलक्ष्मी’, ‘मेरी सहेली’ ,
संपादिका हैं जिनकी कोई फिल्म स्टार
ये सिखाती हैं तरीके पति को रिझाने के,
बैंगन का नये तरीके का भर्ता बनाने के
मुन्ने को मालिश कर सुलाने के, ( मुन्नी को नहीं )
तरीके है पार्टी में मेकअप लगाने के,
बच्चों को बहलाने के,
रूठे पति को मनाने के,
छोड़ो ये पाब्लो- फाब्लो को ,
चलो पड़ोस हल्दी- कुमकुम को,
पर ना लाना विधवा सखी को
कर देगी वह अशुभ ,शुभ को ।
चलो मेरी बहना
काम है कितना !

- घुघूती बासूती

24 टिप्पणियाँ:

Parul ने कहा…

ha ha ha....

Parul ने कहा…

ghughuuti ji maafi chaahungi..magar hansi aa gayi

विनीत कुमार ने कहा…

puranikji ke vyang aur chakradharji ki tukbandi ka combo pack, sirf ghuguti baasuti par, aaj hi cloick kare,legiyae kar diya aapke blog ka vigyapan...ha, ha, ha, ....

खबरची ने कहा…

अपके चिट्ठे पर कुछ फॉंट बहुत ही फीके रंगों में नजर आ रहे हैं। आप ब्लॉगर के डैशबोर्ड पर जा कर लेआउट में फॉंट्स एंड कलर टैब पर जा कर इन्हें किसी अन्य रंग में बदल सकते हैं।

Priyankar ने कहा…

सही भाव और सधी हुई भाषा में पैने व्यंग्य की बेहतरीन काव्य-प्रतिक्रिया .

Beji ने कहा…

:))

PD ने कहा…

बढिया व्यंग्य.. अच्छा लगा पढकर.. :)

Rajesh Roshan ने कहा…

बातो बातो में काफी कुछ कह गई आप. मर्म स्पर्शी

Kakesh ने कहा…

चलिये अब हमें भी भरपेट खाना मिलेगा...फाल्तू में डर गये थे जी.

रंजू ने कहा…

:) :) बहुत खूब !!

mamta ने कहा…

:)

Sanjeet Tripathi ने कहा…

तीक्ष्ण!

Srijan Shilpi ने कहा…

बेहतरीन, महीन व्यंग्य...

नोटपैड और आपकी पोस्ट में जिस सोच को टारगेट किया गया है, उसका प्रतिनिधित्व भी खास तौर पर महिलाएं ही करती हैं.

Srijan Shilpi ने कहा…

पर हां, उसी सोच वाली प्रजाति के कुछ नमूने पुरुषों में भी पाए जाते हैं।

Ranjana ने कहा…

bahin ji ,aap to badi jor se beemaar hain.Aapko manichikitsak ki darkaar hai.

Ranjana ने कहा…

sourri...
manochikitsak,pahle waale me mistek ho gaya.

notepad ने कहा…

घुघुती जी
माफ करें ,
बहुत देर से देखा । बहुत अच्छा लिखा । अब चोखेर बाली पर भी इंतज़ार है । इससे पहले कि कोई और लिखे हमारी हमसे छेने हुई भोगी हुई बात , हम कह डालें उसे अपनी ज़बानी ।

Lavanyam - Antarman ने कहा…

ये कईयों के लिए नोर्मल सी बात है !

हमें, अभी काफी लंबा रास्ता तै करना है

Rachna Singh ने कहा…

mam
चोखेर बाली पर भी इंतज़ार है ।

Pramod Singh ने कहा…

ये ठीक बात नहीं है. बेजी ने पहले से ही मेरा कमेंट उड़ाके चिपकाया हुआ है! की बोलबो की?.. चोखेर कांटा नेई, मुख ओपरे चांटा?

बाज़ार ने कहा…
यह पोस्टलेखक के द्वारा निकाल दी गई है.
Shiv Kumar Mishra ने कहा…

ये अगर रंजना दी की टिपण्णी है तो मुझे एक दम अच्छी नहीं लगी. ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. अगर ये टिपण्णी उन्होंने दी है तो मैं उनकी निंदा करूंगा.

लेकिन मैं यहाँ रचना जी से कुछ कहना चाहूँगा....

रचना जी, ये सच है कि रंजना दी मेरी दीदी हैं. और मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उन्होंने घुघुती जी के बारे में ऐसा लिखा. लेकिन आप की टिपण्णी के बारे में भी मुझे कुछ कहना है.

आप की टिपण्णी से लगता है जैसे मैंने, ज्ञान भैया ने और अनूप जी ने कोई गुनाह किया है, किसी का खून किया है. आपके ये कहने का मतलब जरा समझाईये तो कि ऐसे भाईयों की बहन और कैसी होगी. मैं आपको जानकारी के लिए बता दूँ कि ज्ञान जी और अनूप जी रंजना दी को नहीं जानते.

और आपकी टिपण्णी से लग रहा है जैसे हम तीनों बहुत बड़े गुनाहगार हैं. आपने आजतक कहीं देखा है कि मैंने किसी के ख़िलाफ़ कोई ग़लत टिपण्णी लिखी या फिर किसी को गाली देते हुए पोस्ट लिखा हो? ये आपकी किस तरह की सोच है कि आप मुझे इस तरह से समझ रही हैं. मैंने कभी आपका अपमान किया? मैंने किसी का भी अपमान किया? आप ने जिस तरह से लिखा है, माफ़ कीजियेगा वो बहुत ही बुरा लगा मुझे. आपको ये क्यों लगा कि रंजना दी मुझसे पूछ-पूछ कर सब जगह कमेंट करती होंगी.

आशा है आप मेरी बात समझेंगी और इस तरह के इल्जाम लगाने से बचेंगी.

राजीव जैन Rajeev Jain ने कहा…

तगडा संदेश दिया

Mired Mirage ने कहा…

शिवकुमार जी, मुझे आपसे, ग्यान जी से व अनूप जी से कोई शिकायत नहीं है । यदि मेरे मन में कुछ है तो वह आप सबके लिए आदर है । कभी कभी हमारे विचार अलग हो सकते हैं, परन्तु इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि मेरा आदर आपके लिए कम हो जाता है । वैसे मुझे यह भी लगता है कि कहीं एक दूसरे को समझने में कमी भी हो सकती है । विचारों से शिकायत या झगड़ा हो सकता है व्यक्ति से कतई नहीं । यदि मैंने कोई अनादर किया है तो क्षमाप्रार्थी हूँ ।
घुघूती बासूती