Thursday, September 13, 2007

ब्लॉगर्स मीट? नहीं, नहीं ! हम तो ब्लॉगर्स सब्जी/ ऊँधिया करेंगे !

ब्लॉगर्स मीट? नहीं, नहीं ! हम तो ब्लॉगर्स सब्जी/ ऊँधिया करेंगे !
हिन्दी चिट्ठाजगत इतना माँसाहारी क्यों होता जा रहा है ? जब देखो मीट ! अरे भाई, कभी तो सब्जी, दाल, कढ़ी आदि भी कर लिया करिये । नहीं तो पुलाव ठीक रहेगा । माँसाहारी अपने मीट के साथ और हम अपने मटर पनीर के साथ उसे खा लेंगे ।
हमारा गुजरात तो वैसे भी लगभग शाकाहारी है। देखना जब हम यहाँ मिलेंगे तो उसे मीट नहीं कहेंगे । उसे यहाँ का प्रसिद्ध ब्लॉगर्स ऊँधिया ही कह लेंगे पर मीट तो कतई नहीं कहेंगे । अन्डा करी तक तो हम बर्दाश्त भी कर लेते , पर मीट ! राम राम ! गाँधी की जन्म भूमि में इतनी हिंसा ! हम तो रोज यही भजन करते हैं .. “वैष्णव जन तो तैके कहिये जो पीर बकरे की जाने रे ।“
अगली बार जब कोई मीट करिये तो एक बकरे के मैमने को भी बुला लीजियेगा । उसकी मैं मैं से आपका माँसाहारी , हिंसक मन भी पसीज जायेगा ।
शीघ्र ही आपको एक चिट्ठाकार ऊँधिया का वर्णन देने का वादा रहा ।
घुघूती बासूती

19 comments:

  1. थोड़ा सब्र धरिये. हम दिसम्बर प्रथम सप्ताह में आपसे मिलने अहमदाबाद आ रहे हैं, तभी ऊँधिया का कार्यक्रम रखियेगा. :)

    मीट हम कहीं और देख लेंगे.

    ReplyDelete
  2. बकरे के मेमने को बुलाने का सुझाव उत्तम है।

    ReplyDelete
  3. ठीक है । आप ब्‍लॉगर उंधिया दें या ढोकला या फिर ब्‍लॉगर खमण या ब्‍लॉगर खाकरा ।
    हमें सब चलेगा ।
    कहते हैं कि भुख्‍खड़ चूज़ी नहीं होते ।
    हा हा हा ।

    ReplyDelete
  4. इंतजार है. मीट की जगह कुछ भी चलेगा.

    ReplyDelete
  5. संजय बेंगाणी10:35 am

    आगे से ब्लॉगर/चिट्ठाकार "मिलन" कहा जाएगा. :)

    ReplyDelete
  6. उम्मीद है की आपका सुझाव लोग प्रयोग मे लाएंगे। :)

    ReplyDelete
  7. वाह आपने आज तीन बरस के बाद उंधिया की याद दिलवा दी, गुजरात छोड़ेने के बाद जैसे तरस से गये गुजराती पकवानों के। घारी, पेटीस, गोटा, खमण आदि ना जाने क्या क्या ..?
    वैसे दक्षिण भारत में हम चिठ्ठाकार मिलन को क्या कहेंगे " चिठ्ठाकार इडली" या "ब्लॉगर डोसा"???

    ReplyDelete
  8. अब कुछ दिनों में पाठक ब्लागर्स पीट कार्यक्रम भी ऱखने वाले हैं।

    ReplyDelete
  9. हम तो पक्के चौबे हैं,मथुरा वाले. हमें प्रिय है मिठाई. हम तो इसे "ब्लौगर'स मीठ " कहना पसन्द करेंगे.

    ReplyDelete
  10. यह ऊँधिया के साथ जलेबी,पौंक और पतंग नहीं मिल सकती ??

    ReplyDelete
  11. सुझाव उत्तम है, उम्मीद है लोग प्रयोग मे लाएंगे।

    ReplyDelete
  12. वाह!!

    आपकी इस पोस्ट के बाद गुजरात में चिट्ठाकार मिलन की संभावनाएं हमें दिख रही है।

    वैसे आलोक पुराणिक जी ने सही कहा है!

    ReplyDelete
  13. अरे , लगता है आप ने दिल पे ले लिया ...

    और अगर ऐसा ही है तो इलाहबाद कि चाट या बम्बई कि पाव - भाजी क्या बुरी है :)

    ReplyDelete
  14. हिंदी दिवस पर मेरी तरफ़ से बधाई
    दीपक भारतदीप्

    ReplyDelete
  15. आपके प्रयास सराहनीय है और में अपने ब्लॉग पर आपका ब्लॉग लिंक कर दिया है।
    रवीन्द्र प्रभात

    ReplyDelete
  16. Good posting, tahnk you!
    Have a good day

    ReplyDelete
  17. आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
    ऎसेही लिखेते रहिये.
    क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
    जो हमे अच्छा लगे.
    वो सबको पता चले.
    ऎसा छोटासा प्रयास है.
    हमारे इस प्रयास में.
    आप भी शामिल हो जाइयॆ.
    एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

    ReplyDelete
  18. बहुत ही स्वाद मिलन रहेगा यह :) मुझे अभी से खुशबु आ रही है ..कब आना है जल्दी से तरीख बताये :)

    ReplyDelete