
आजा, मन रंग डालें मिलकर।
मन कहता है, आज ये मेरा
रंग डालूँ तुझे रंगों से अपने
बैंगनी, हरे, लाल,नीले, पीले
रंगों से सजा दूँ चेहरा तेरा।
खेलूँ रंग यूँ साथ मैं तेरे
भीगे तू भी संग में मेरे
ना पहचाने जाएँ ये चेहरे
घुल मिल जाएँ तेरे मेरे।
खेलूँ होली ऐसी मैं यूँ रमकर
रंग जाए मन अन्तः भी तेरा
मैं भी रंग जाऊँ रंग में तेरे
खेलें होली दो मन जमकर।
तेरा मेरा भेद आज मिटाकर
इक दूजे की आत्मा भिगाकर
खेलें होली हम जग से हटकर
आजा, मन रंग डालें मिलकर।
छूट जाएँगे सब रंग चेहरे से
बदल जाएँगे कपड़े भी तन के
बीत जाएगा यह दिन होली का
कल हो जाएँगे सब पहले से।
भीगें जो दो मन इस होली में
सूखें नहीं कभी इस जीवन में
रंग लगाए इस बार जो हमने
छूट ना पाएँ वे कभी जीवन में।
घुघूती बासूती
सभी को होली की शुभकामनाएँ !
घुघूती बासूती