समाचार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएँ
समाचार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएँ

बुधवार, नवंबर 07, 2007

सौराष्ट्र में भूकम्प के झटके

कल ६ नवम्बर को सौराष्ट्र में भूकम्प, जिसे गुजराती में धरतीकम्प कहते हैं, आया । सुबह ५ बजकर ५८ मिनट पर और फिर दोपहर ३ बजकर ८ मिनट पर रीटर स्केल पर ५.१ के ये झटके हमारे इलाके में भी महसूस किये गये । भूकम्प का केन्द्र जूनागढ़ जिले के तलाला तालुके के खखरावाडा गाँव में था । तलाला में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई, ५० मकानों को हानि पहुँची व बहुत से मकानों में दरारे पड़ गयीं । जूनागढ़ में भी कुछ मकानों को क्षति पहुँची । कल दिन भर २० छोटे झटके भी आए ।
सौराष्ट्र के लिए प्राकृतिक आपदाएँ कोई नई चीज नहीं हैं । २००१ के भूकम्प में भी इसे काफी जान माल की हानि सहनी पड़ी थी । सन ९७ या ९८ में जब मैं यहाँ रहने नहीं आई थी , तब एक समुद्री तूफान ने भी भयंकर तबाही मचाई थी । इस वर्ष यहाँ वर्षा ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये थे और जगह जगह बाढ़ आई थी । यह भी माना जा रहा है कि यह भूकम्प इसी भारी वर्षा का परिणाम है ।
जैसे ही दोपहर का झटका समाप्त हुआ मैं ने झट से अंदर आकर माँ को फोन किया और बताया कि यहाँ भूकंप आया और हम ठीक हैं । फिर बिटिया को फोन किया । २६ जनवरी २००१ के भूकम्प के बाद भी मैंने झट से माँ को फोन किया । उसके बाद ३ दिन तक फोन लाइन्स बंद रहीं । तब तो टी वी पर दिन रात इसी के बारे में समाचार दिये जाते थे । भाई आज भी कहता है कि मेरा घर फोन करना एक मास्टर स्ट्रोक था । मेरी माँ को चिन्ता की भयंकर बीमारी है । वे तो किसी भी बात पर चिन्ता कर सकती हैं फिर जब वे टी वी देखती तो ना जाने कितनी चिन्ता करतीं ।
इस बार टी वी के समाचारों पर भूकम्प का कोई जिक्र भी नहीं आया । बस कभी कभार नीचे एक

पंक्ति दी जाती थी। कारण शायद यही रहा होगा कि केवल छोटे छोटे गाँव व कस्बे ही इसकी चपेट में आए थे। या शायद इसलिए की सचिन ने कप्तानी करने से इन्कार कर दिया था सो टी वी चैनल वालों ने हमारे धरतीकम्प की चर्चा करने से इन्कार कर दिया ।
टी वी पर क्या समाचार बनेगा और क्या नहीं बनेगा यह घटना पर निर्भर नहीं करता अपितु इस बात पर निर्भर करता है कि उस दिन बाँकी समाचार कितने बड़े या मसालेदार हैं । कल कुछ चैनल पर तो बेरहम माँ ने ४ दिन की बच्ची को रेलवे ट्रैक पर छोड़ा ही सबसे बड़ी खबर थी । फिर सचिन जी का समाचार । सो हमारा धरतीकम्प खबर बनने से रह गया ।
हमने सोचा कि हम ही इसे खबर बना दें ।
घुघूती बासूती